How to write FIR in Hindi? format- Lawyerblog

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आज कल समाज में अपराधी घटना घटती  है जैसे चोरी ,हत्या ,लूट ,बलात्कार ,मारपीट होती रहती है तो हमे नहीं पता होता की शिकायत कैसे दर्ज करे।  हमे नहीं  पता होता की हमे How to write FIR in Hindi? पुलिस FIR को दर्ज नहीं करत है तो आप क्या करा चाहिए। How to write FIR in Hindi? 

इस  सभी समस्याओं  का समाधान इस article से पता चलेगा , पुलिस एफआईआर में सुधार के लिए सुपर उपयोगी टिप्स

FIR का meaning क्या है हिंदी ( what is  meaning FIR )

FIR का अभिप्राय (meaning ) प्रथम सूचना (इत्तिला ) से   है First Information Report   से है  इसका  अभिप्रय है,  जो व्यक्ति   शिकायत  को लिखत में  या  मौखिक ( बोलकर ) थाने में सूचन संज्ञय अपराध   देता   है   अपराध  संबंधित यदि, आप नहीं लिख सकते , आपको लिखना नहीं आता,  तो  पुलिस अधिकारी उस शिकायत को लिखित करेगा और उस  शिकायत को पढ़कर  सुनायेगा .

आपकी  शिकायत संज्ञेय अपराध है तो पुलिस उसकी अन्वेषण करगी अन्वेषण का अभिप्रय यह है की पुलिस (भारसाधक अधिकारी ) शिकायत से  संबधित सबूत को   इकट्ठा करेगा।   

 जो सुचना पुलिस को मिली है उसे हो सरकार द्वारा बनाये format में दर्ज करेगा और FIR की कॉपी प्रति निःशुल्क (बिना पैसे ) के शिकायत करने वाले   को देना होता है

यदि, आप पुलिस आपकी शिकायत नहीं लेती है, तो आप को क्या करना होता है ?

आप को अपनी लिखित शिकायत को डाक से पुलिस प्रभारी को भेजना चाहिए।

7 दिन तक इंतजार करो,

शिकायत ऐसी है कि आप के सबूत खत्म हो सकते हैं तो आप तत्काल पुलिस अधीक्षक को कंप्लेंट करें और उसके अंदर यह भी बताएं की सबूत ऐसा है कि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो वह समाप्त हो सकते हैं 

यदि आप शिकायत पर FIR  नहीं करते को आप को पुलिस अधीक्षक  को लिखत में अपनी इत्तला देना चाहिए। 

पुलिस अधीक्षक द्वारा कार्याही नहीं की जाती है तो आप भारतीय दंड सहित  की धारा 156 (3 ) के अंतर्गत आप मजिस्ट्रेट के पास आवेदन

 

करेंगे।, आपकी प्रथम सुचना को दर्ज करने निर्देश दे पुलिस को। और आपकी एफ आई आर दर्ज हो

How to write FIR in Hindi?

सेवा में ,

 श्रीमान थाना प्रभारी जी

 थाना ( थाने  का नाम  लिखे )नई दिल्ली – (एरिया का पिन कोड ).

विषय :- शिकायत  विरुद्ध  ( यहाँ पर दोषीगण  का का नाम और उसके पिता नाम  और पता लिखे ) 
 के द्वारा मकान  से निकलने एवं गली –  गलोच  एवंम प्रार्थी  को जान से मरने की धमकी  और झूठे  केस  फसाने ,प्लॉट से बेदखल करने के  संबंध शिकायत पत्र (जो अपराध हुआ है उसके बारे में लिखना है )

 महोदय ,
             सविनय  निवेदन इस प्रकार से है :-

  1. शिकायत कर्ता  का नाम  और पता लिखे( …… )  में परिवार सहित रहता है 
  2. यह है कि  प्रार्थी  और दोषी नंबर no.1  और no.2 दोनों  ही उपरोक्त  प्लॉट  के मालिक हैं और उस प्लॉट में दोषीगण नंबर no.1  और no.2 नीचे रहता है और प्रार्थी प्रथम तल पर रहता है इस भूमि को लेकर हमेशा – आपस में विवाद बना रहता है दोषी व्यक्ति इस संपत्ति को हड़पना चाहते हैं और संपूर्ण रूप से मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए उसे बार-बार मानसिक, शारीरिक पीड़ा देते रहते हैं
  3. दिनांक। …….. करीब समय 8:00am ( घटना जा घटी  है उस दिन की तरीक और समय लिखे और जगह )        को  दोषी  न १  और 2 ,3 के द्वारा शिकयतकर्ता  को  बुरी -बुरी  गाली  गलोच करने लगा , उन्होंने कहा कि यह मकान मेरा है तुम लोग यहां से भाग जाओ नहीं तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा उसने मुझे 3 दिन का टाइम दिया है  की 3 दिन के अंदर नहीं गए यहां से, तो  मैं तुम्हारी हत्या कर दूंगा,पुलिस मेरा कुछ भी नहीं कर पाएगी ,पुलिस को भी खरीद लूंगा  ,दोषी गण  no २  ने मुझे कहा कि तुम यहां रहोगे तो मैं तुम्हें बलात्कार या कोई अन्य केस में  फंसा दूंगी और तुम जीवन भर तक जेल में   सड कर मर जाओगे 
  4. दिनांक ——  ,दोषी गण  नंबर 1,2,3  ने मिलकर मेरे घर पर आए और मेरा ताला तोड़ दिया और संदूक में से डाक्यूमेंट्स उठा ले गया जब मैंने पूछा तो तीनों जनों ने मुझे गाली देना शुरू कर  दिया कहा कि यह मेरी संपत्ति है मैं कुछ भी करूं,तीनों दोषी गण मुझे मेरी संपत्ति से मुझे बेदखल चाहते हैं और   अपना कब्जा जमाना चाहते हैं जिसके कारण से मुझे जान से मारना भी चाहते हैं मैं अब बहुत डरा डरा महसूस कर रहा हूं मेरे जान माल का दोनों का खतरा बना हुआ 

            अतःआपसे विनम्र निवेदन है कि आप उचित कानूनी कार्यवाही करें , आप मेरी जान माल की रक्षा करें एवं दोषियों  के  विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करें
                                    मै  इस कार्य के लिए सदा अभारी रहुँगा

प्रार्थी 
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     एफआईआर एप्लीकेशन लिखनें से महत्पूर्ण  मुख्य बाते ध्यान  रखे 

 

  1. जहां पर भी अपराध की घटना घटी है उस क्षेत्र में लगने वाले पुलिस स्टेशन में आपको शिकायत देनी है
  2. जो शिकायत लिखनी है वहां पर थाना प्रभारी / एसएचओ के नाम से देना होता है   थाने का नाम और पता उसमें डालें
  3. दोषी गण का नाम पिता का नाम पता और  जो अपराध किया है उसके बारे में विवरण लिखें संक्षिप्त रूप से
  4.  पहले शिकायतकर्ता का नाम पता लिखें
  5. जो अपराधी घटना घटी है, उसमे क्या समय था किस स्थान पर था उसका विवरण दें हो सके तो यह भी देखें कौन-कौन वहां पर  उपस्थित इस घटना को देख रहा था जो कि आपके गवाह  के रूप में आ सकते हैं . 
  6. जो भी आप के पास सबूत  है जैसे अपने कोई  फ़ोन की रिकॉडिंग ,cctv की रिकॉडिंग वह सब आप पुलिस अफसर को दे और उनसे रिसीविंग ले.केस को मजबूत बने के लिए सबूत  होना चाहिए 
  7. शिकायत पत्र अपने स्वयं  के हस्ताक्षर होना चाहिए

 किसी महिला के विरुद्ध यदि कोई अपराध हुआ है तो उसकी सूचना को कौन अभी लिखित करेगा

 यदि किसी महिला के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 326 धारा 326 धारा 354 धारा 354 धारा 376 कोई भी दी जाती है ,

महिला पुलिस अधिकारी द्वारा लिखित किया जाएगा 

सूचना दर्ज करने का पुलिस का संवैधानिक कर्तव्य है

 यदि कोई भी थाने के भारसाधक अधिकारी को किसी संज्ञेय अपराध की सूचना दी जाती है जो की F.i.r. को लिखने के लिए बाध्य है

सुप्रीम कोर्ट मुख्ये निर्यण :

प्रकाश सिंह बादल  एवं अन्य  बनाम  पंजाब राज्य एवं अन्य 2007  (एससी)  के मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संहिता की धारा 154 (1 )  के  समादेश के  अनुपालन में

संज्ञेय अपराध को प्रकट करने वाली इत्तीला के आधार पर अपराध या  मामले का पंजीकरण करने के प्रक्रम पर संबद्ध पुलिस अधिकारी इस बात का अवलंबन नहीं ले सकता की क्या सूचना द्वारा दी गई इतना विश्वसनीय है .

असली है या अन्यथा और मामले का इस आधार पर पंजीकृत करने से इंकार नहीं कर सकता है कि इत्तिला   विश्वास के योग्य नहीं है .

दूसरी तरफ थाने का भारसाधक अधिकारी कानूनी रूप से मामले को पंजीकृत करने और उसके  पश्चात अन्वेषण कार्यवाही करने के लिए बाध्य है

यदि उसके पास संज्ञेय अपराध   कारित  करने के  प्रती  संदेश  व्यक्त करने का कारण है तो प्रारंभिक जांच कर सकता है यदि f.i.r. गलत पाया जाता है तो अभियोजन परिवादी के विरुद्ध गलत एफ आई आर दर्ज करने के विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है
 

Vikas Shukla is a lawyer and writer of blog. He writes on various law topics like crime, civil, recovery and family matters. He is a graduate in law who deals and practices with criminal matters, civil matters, recovery matters, and family disputes. He has been practicing for more than 5 above years and has cases from all over India. He is honest and hardworking in his field. He helps people by solving their legal problems. His blog provide valuable insights about law topics which are helpful for people.

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